ताजा खबर
‘सजन रे’ के साथ शुरू हुआ नोरा फतेही का नया I-Pop सफर   ||    सोनम कपूर के न्यूबॉर्न बेबी की पहली झलक, रिया कपूर का इमोशनल पोस्ट हुआ वायरल   ||    रामायण में भगवान राम बनने से पहले रणबीर कपूर ने क्यों कहा था ‘ना’, जानिए पूरी कहानी   ||    रामायण के लिए रणबीर कपूर ही क्यों? नितेश तिवारी ने बताया खास कारण   ||    रजत दलाल की ड्रीमी वेडिंग ने जीता दिल, मिस्ट्री ब्राइड बनी चर्चा का विषय   ||    राजा शिवाजी का दमदार टीज़र रिलीज   ||    सलमान खान की नई फिल्म में नयनतारा की एंट्री, पहली बार बनेगी दमदार जोड़ी   ||    'हैप्पी बर्थडे जोशी' का ऐलान: अजय देवगन का नया प्रोजेक्ट सच्ची घटना से प्रेरित   ||    मनीष मल्होत्रा ​​की माँ की प्रार्थना सभा में शामिल हुए सितारे   ||    ‘कथानार- द वाइल्ड सॉर्सेरर’ का ट्रेलर हुआ रिलीज, अनुष्का शेट्टी का मलयालम डेब्यू   ||   

CPCB अपनी ही रिपोर्ट से पलटा, NGT से कहा- महाकुंभ में संगम का पानी नहाने लायक था

Photo Source :

Posted On:Monday, March 10, 2025

प्रयागराज: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने हाल ही में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें यह दावा किया गया है कि प्रयागराज में हाल ही में संपन्न महाकुंभ 2025 के दौरान गंगा और यमुना नदियों का पानी स्नान के लिए उपयुक्त पाया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अलग-अलग दिनों और स्थानों पर लिए गए जल नमूनों में गुणवत्ता का अंतर देखा गया, लेकिन स्नान के लिए जल की गुणवत्ता सुरक्षित रही।

रिपोर्ट 7 मार्च को हुई सार्वजनिक

सीपीसीबी की यह रिपोर्ट 28 फरवरी को तैयार हुई थी, जिसे 7 मार्च को एनजीटी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि महाकुंभ के मुख्य स्नान पर्वों के दौरान प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों के किनारे पानी की गुणवत्ता स्नान मानकों के अनुरूप थी। सीपीसीबी ने 12 जनवरी से महाकुंभ के दौरान हर सप्ताह दो बार गंगा के पांच स्थानों और यमुना के दो स्थानों पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी की थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जल गुणवत्ता में अंतर सीवेज डिस्चार्ज, सहायक नदियों के प्रवाह और मौसमी परिस्थितियों के कारण हुआ।

रिपोर्ट में क्या-क्या सामने आया?

सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, जल में मौजूद पीएच स्तर, घुलित ऑक्सीजन (DO), जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD) और फेकल कोलीफॉर्म (FC) के मापदंडों में समय और स्थान के आधार पर भिन्नता देखी गई।
रिपोर्ट के अनुसार,

  • घुलित ऑक्सीजन (DO) स्तर औसतन 8.7 मिलीग्राम प्रति लीटर था, जो मानक 5 मिलीग्राम प्रति लीटर से कहीं अधिक है।
  • बीओडी का स्तर औसतन 2.56 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया, जो 3 मिलीग्राम प्रति लीटर की अधिकतम सीमा के अंदर है।
  • फेकल कोलीफॉर्म (FC) औसतन 1,400 यूनिट प्रति 100 मिलीलीटर था, जबकि इसकी स्वीकृत सीमा 2,500 यूनिट प्रति 100 मिलीलीटर है।

जल की शुद्धता पर विवाद भी हुआ

महाकुंभ के दौरान गंगा और यमुना के जल की शुद्धता को लेकर विवाद भी खड़ा हुआ। सीपीसीबी ने 3 फरवरी को एनजीटी को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें गंगा-यमुना के पानी में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक बताई गई थी। इसके बाद 18 फरवरी को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने एक नई रिपोर्ट दी, जिसमें सीपीसीबी के निष्कर्षों को खारिज कर दिया गया।
एनजीटी ने इस विरोधाभासी रिपोर्टिंग पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और यूपीपीसीबी से नई ताज़ा रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।

आगे क्या?

अब एनजीटी द्वारा दोनों रिपोर्ट्स के आंकड़ों की गहन समीक्षा की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन में जल गुणवत्ता की निगरानी और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। हालांकि, सीपीसीबी की रिपोर्ट ने श्रद्धालुओं को यह आश्वस्त किया है कि स्नान जल सुरक्षित था, फिर भी विभिन्न एजेंसियों के बीच डेटा के विरोधाभास को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


अहमदाबाद और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. ahmedabadvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.